करवा चौथ (Karva Chauth)  का पर्व सम्‍पूर्ण भारत में मनाया जाने वाला पर्व है, करवा चौथ (Karva Chauth)  के दिन सभी सुहागिनें अपने पति की लम्‍बी अायु के लिये निर्जला व्रत रखती हैं एवं अपने पति के दीर्घायु हाेने की कामना करती हैं। आईये जानते हैं  करवा चौथ (Karva Chauth) का महत्व एवं व्रत की पूजन विधि- 

करवा चौथ व्रत का महत्व

हमारे ध्‍ाार्मिक ग्रन्‍थों में इस व्रत का बडा ही महत्‍व बताया गया है। कार्तिक मास कि चतुर्थी के दिन करवा चौथ का व्रत किया जाता है। करवा का अर्थात मिट्टी के पात्र में जल लेकर चंद्रमा को अर्ध्य दिया जाता है । इसीलिए यह व्रत करवा चौथ नाम से जाना जाता हैं। इस दिन पत्नी अपने पति की दीर्घायु के लिये मंगलकामना और स्वयं के अखंड सौभाग्य रहने कि कामना करती हैं। 

करवाचौथ के व्रत की विधि - Karva Chauth Vrat Poojan Vidhi 

सुबह जल्‍दी उठें और व्रत का संकल्‍प करें। बहुत से परिवारों में इस अवसर पर सरगी खाने का भी रिवाज है। यदि आपके यहॉ सरगी खायी जाती है तो सुबह जल्‍दी उठकर सरगी खायें। नहाने से पहले ही चूडियाँ व बिछुए बदल लें। नहाने के बाद चूडियाँ न पहनें। करवाचौथ से एक दिन पहले ही सिर धो लें। यह व्रत निर्जला रखा जाता है इसमें पानी भी नहीं पीते हैं। करवाचौथ के दिन सोलह श्रृंगार करें। करवाचौथ का चिञ दीवार पर अच्‍छी तरह चिपका लें। उसके सामने जमीन पर चौक पूरें। चौक के चारों कोनों एवं बीच के भाग में अनाज के दाने डाल दें। एक करवा सजा कर उसमें जल भरें अौर उसके साथ एक लोटे में भी जल भरें अौर दाेनों को ढककर चौक पर रखें। पीली मिट्टी से शंकर पार्वती की छोटी-छोटी मूर्ति बनायें और उन्‍हें सजाकर कपडा उढाकर एक लकडी के पट्टे पर बैठायें। मिट्टी न मिले तो पीतल की छोटी-छोटी शंकर पार्वती की मूर्ति रख लें। उनके सामने एक दीपक जलाकर रखें। आठ पूरियों की अठावरी लेकर उन पर हलवा एवं श्रद्धानुसार दक्षिणा रखें। इसके अतिरिक्‍त दो पूरी और लें, उन भी हलवा एवं दक्षिणा रख लें। एक साडी एवं सभी श्रृंगार का सामान भी रख लें। इसके पश्‍चात् पूजा करें। पूजा करने के बाद हाथ में चावल लेकर करवाचौथ एवं गणेश जी की भी कहानी सुनें। कहानी के बाद एक दो बधाये अवश्‍य गायें। पूजा करने के बाद अठावरी और श्रृंगार के सामान का संकल्‍प करके अपनी सास या ननद को दे दें। इसके बाद चन्‍द्रमा के दर्शन कर चन्‍द्रमा को अर्ध्य दें और पूजन कर आरती करें। इसके बाद पति, सास-ससुर और बुजुर्गो के चरणस्पर्श करें अौर जल पीकर व्रत तोडें।

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