रक्षाबंधन (raksha bandhan) की दूसरे दिन कजलियां पर्व (Kajalia Festival) मनाया जाता है, आईये जानते हैं कजलियां पर्व का महत्‍व - Kajalia ka mahatva -

कजलियां पर्व का महत्‍व - Kajalia Ka Mahatva

कजलियां मुख्‍यरूप से बुंदेलखंड में रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) के दूसरे दिन की जाने वाली एक परंपरा है जिसमें नाग पंचमी (Nag Panchami) के दूसरे दिन खेतों से लाई गई मिट्टी को बर्तनों में भरकर उसमें गेहूं बो दिये जाते हैं और उन गेंहू के बीजों में रक्षाबंंधन के दिन तक गोबर की खाद् और पानी दिया जाता है और देखभाल की जाती है, जब ये गेंहू के छोटे-छोटे पौधे उग आते हैं तो इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि इस बार फसल कैसी होगी, गेंहू के इन छोटे-छोटे पौधों को कजलियां ( Kajalia) कहते हैं। कजलियां ( Kajalia) वाले दिन घर की लड़कियों द्वारा कजलियां ( Kajalia) के कोमल पत्‍ते तोडकर घर के पुरूषों के कानों के ऊपर लगाया जाता है, जिससे लिये पुरूषों द्वारा शगुन के तौर पर लड़कियों को रूपये भी दिये जाते हैं।

इस पर्व में कजलिया लगाकर लोग एक दूसरे की शुभकामनाये के रूप कामना करते है कि सब लोग कजलिया की तरह खुश और धन धान्य से भरपूर रहे इसी लिए यह पर्व सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।




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