भाद्रपद महीने (Bhadon Month) की कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha) की अमावस्या (Amavasya) को Kush कुशग्रहणी अमावस्या (Grahani Amavasya) या कुशोत्पाटिनी अमावस्या कहते हैं, आईये जानते हैं कुशग्रहणी अमावस्या का महत्‍व (Kush Grahani Amavasya Ka Mahatva) -

कुशग्रहणी अमावस्या का महत्‍व - Kush Grahani Amavasya Ka Mahatva


इस अमावस्‍या के दिन कुश एकत्रित का महत्‍व होता है, कुश एक घास होती है हिंंदू धर्म में धार्मिक क्रिया-कलापों के समय कुश हाथ में लेने का महत्‍व होता है, ऐसी मान्‍यता है कि कुशग्रहणी अमावस्या (Kush Grahani Amavasya) के दिन प्रत्‍येक व्‍यक्ति को कुश इकठ्ठा करनी चाहिये। हिंदु शस्‍ञों के अनुुसार कुश दस प्रकार की होती है, आपको को जो भी मिल जाये आप उसे संग्रहित कर लें।

कुश संग्रह करने के नियम - 

ऐसी कुश देखें जिसमें पत्ती हो और आगे का भाग कटा न हो और हरा हो, वह देव तथा पितृ दोनों कार्यों के लिए उपयुक्त होता है। कुश निकालने के लिए कुशग्रहणी अमावस्या (Kush Grahani Amavasya) के दिन सूर्योदय के समय उपयुक्त स्थान पर जाकर पूर्व या उत्‍तर की तरफ मुॅह करके बैठकर "हुँ फट्" मंञ का जाप करते हुए दाहिने हाथ से कुश उखाड़ें और एकञ करें। 

कुशग्रहणी अमावस्या (Kush Grahani Amavasya) के दिन कुश हाथ में लेकर पितारों की पूजा और श्राद्ध करने से पितर संतुष्ट और प्रसन्न होते हैं साथ ही किए गए दान का कई गुणा फल प्राप्त होता है।

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