रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) का त्‍यौहार श्रावण मास (Shravan Maas) की पूर्णिमा (Purnima) के दिन पूरे भारत में मनाया जाता है, इसलिये इसको राखी पूर्णिमा (Rakhi Purnima) या राखी का त्यौहार (Rakhi Ka Tyohar) भी कहते हैं, यह त्‍यौहार भाई-बहनों का त्योहार होता है, आईये जानते हैं - रक्षाबंधन का महत्व (Raksha Bandhan Ka Mahatva) -

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रक्षाबंधन का महत्व - Raksha Bandhan Ka Mahatva

रक्षाबंधन का पौराणिक महत्‍व - Mythological significance of Raksha Bandhan

आज रक्षाबंधन केवल भाई बहनों का त्‍यौहार रह गया है लेकिन बहुत कम लोग ही जानते हैं कि पुराने समय में जिसे आप राखी कहते हैं वह रक्षासूत्र कहलाता था, जैसा कि हम पहले बता चुके हैं श्रावण मास (Shravan Maas) बहुत पविञ माना जाता है, श्रावण मास (Shravan Maas) में ऋषिगण आश्रम में रहकर अध्ययन और यज्ञ करते थे । श्रावण-पूर्णिमा यानि रक्षाबंंधन के दिन इस मासिक यज्ञ की पूर्णाहुति होती थी, जिसमें वह अपने यजमानों को रक्षासूत्र बाँधा करते थे, आज भी जब आप घर में कोई शुभ काम कराते हैं जो कलावा बाँधा जाता है यह उसी परंपरा का हिस्‍सा है।

रक्षाबंधन के दिन बहनें सुबह-सुबह तैयार होकर राखी की थाली तैयार करती हैं भाइयों की दाहिनी कलाई में राखी बांधती हैं, उनका टीका रोली चावल सेे करती हैै, और आरती उतारती है और उनसे अपनी रक्षा का संकल्प लेती हैं। जिसके बदले भाई अपने बहन का रक्षा का वचन देता है और साथ ही कुुछ उपहार भी देते हैं। इस दिन घरों में पकवान बनाये जाते हैं, जिसमें मुख्‍यरूप से घेवर सेवई होती हैं।

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