भाद्रपद महीने (Bhadon Month) की शुक्‍ल पक्ष (Shukla Paksh) की द्वादशी तिथि (Dwadashi Tithi) को वामन द्वादशी (Vaman Dwadashi) कहते हैं, वामन द्वादशी (Vaman Dwadashi) को वामन जयंती (Vamana Jayanti) नाम से भी जाना जाता है - वामन द्वादशी (Vaman Dwadashi) का हिंदू धर्म में बहुत महत्‍व होता है तो आईये जानते हैं वामन द्वादशी का महत्‍व (Vaman Dwadashi Ka Mahatva) -

वामन द्वादशी का महत्‍व - Vaman Dwadashi Ka Mahatva

भगवान विष्णु के दस अवतार (Dashavatar) में से एक हैं वामन अवतार (Vaman Avatar), वामन अवतार भगवान विष्णु का महत्वपूर्ण अवतार माना जाता है, इसके संबध में बहुत रोचक कथा है - दैत्यराज बलि सम्‍पूर्ण संसार पर अधिकार करने वाला था, देवता भी उसके आगे टिक नहीं पा रहे थे, हारकर देवतागण और इंद्र भगवान विष्‍णु की शरण में जाते हैं और सहायता करने के प्रार्थना करते हैं, विष्‍णु भगवान देवताओं की मदद करने के लिये कश्यप जी के कहने से भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन माता अदिति के गर्भ से प्रकट हो अवतार लेते हैं तथा ब्राह्मण का रूप धारण करते हैं और वामन रुप में श्री विष्णु ने राजा बलि से भिक्षा में तीन पग भूमि मांगते हैं, राजा बलि अपने वचन पर अडिग रहते हुए, श्री विष्णु को तीन पग भूमि दान में दे देते हैं. वामन रुप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग ओर दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया और अभी तीसरा पैर रखना शेष था. ऐसे मे राजा बलि अपना वचन निभाते हुए अपना सिर भगवान के आगे रख देते हैं और वामन भगवान के पैर रखते ही, राजा बलि परलोक पहुंच जाते हैं। बलि के द्वारा वचन पालन करने पर भगवान विष्णु अत्यन्त प्रसन्न होते हैं बलि को पाताललोक का स्वामी बना देते हैं इस तरह भगवान वामन देवताओं की सहायता कर उन्हें पुन: स्वर्ग का अधिकारी बनाते हैं। 

ऐसी मान्‍यता है कि इस दिन वामन भगवान की स्वर्ण प्रतिमा बनवाकर श्रद्धाभाव से पूजा करने से वामन भगवान सभी कष्टों को दूर करते हैं और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। 

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