माघ मास (Magh Month) में कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha) की अष्टमी तिथि (Ashtami tithi) को कालाष्टमी (Kalashtami) या भैरव अष्‍टमी (Bhairava Ashtami) कालभैरव जयंती (Kalabhairav Jayanti ) कहते हैं। आईये जातने हैंं भैरवाष्टमी या कालाष्टमी का महत्‍व Bhairava Ashtami aur Kalashtami Ka Mahatva

भैरवाष्टमी या कालाष्टमी का महत्‍व - Bhairava Ashtami aur Kalashtami Ka Mahatva

कालाष्टमी का हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्‍व है। मान्‍यता है भगवान भोले नाथ अष्टमी तिथि (Ashtami tithi) को भैरव (Bhairava) रूप में प्रकट हुए थे, इसी उपलक्ष्य में कालाष्टमी का व्रत किया जाता है, इसे भैरवाष्टमी’ के नाम से भी जाना जाता है। भैरव की पूजा व उपासना से मनोवांछित फल मिलता है। भगवान भैरवनाथ का वाहन ‘श्वान’ (कुत्ता) है। अत: इस दिन कुत्ते को भोजन कराने का महत्‍व भी है। कालाष्टमी (Kalashtami) के दिन काल भैरव के साथ-साथ इस दिन देवी कालिका की पुजा-अर्चना एवं व्रत का भी विधान है। काली देवी की उपासना करने वालों को अर्धरात्रि के बाद माँ की उसी प्रकार से पूजा करनी चाहिए, जिस प्रकार दुर्गापूजा में सप्तमी तिथि को देवी कालरात्रि की पूजा का विधान है।

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