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माघ मास (Magha Maas) में शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha) में पड़ने वाली पंचमी को बसन्त पंचमी (Basant Panchami) कहते हैं। भारत (India) अौर नेपाल (Nepal) में वसन्त पंचमी ( Vasant Panchami ) बड़ी धूम धाम से मनाई जाती है वसन्त पंचमी ( Vasant Panchami ) के दिन विद्या की देवी (Vidya Ki Devi) माता सरस्वती (Mata Sarswati) की पूजा अर्चना की जाती है , आईये जानते हैं बसंत पंचमी का महत्व (Basant Panchami Ka Mahatva)

Importance Of Basant Panchami - बसंत पंचमी का महत्व 

वसन्त पञ्चमी (Vasant panchami) के दिन माता सरस्वती की पूजा (Saraswati Puja) अर्चना की जाती है इस दिन महिलाये और बच्चे पीले वस्त्र पहनते है और माता सरस्वती को पीली मिठाई का भोग लगाते है, वसंत पंचमी (Basant Panchami) को श्रीपंचमी (shree panchami) भी कहते हैं यह बहुत बडा एक हिन्दू त्योहार है। हिंदू धर्म के अनुसार बसंत पंचमी (Basant Panchami) के दिन माता सरस्‍वती का जन्‍म हुआ था, मां सरस्वती विद्या और बुद्धि प्रदान करती हैं. बसंत पंचमी (Basant Panchami) के दिन इनकी उत्पत्ति हुई थी, इसलिए बसन्त पंचमी के दिन इनका जन्मदिन मनाया जाता है. मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है और विद्या और बुद्धि का वरदान मांगा जाता है. 
बसंत पंचमी (Basant Panchami) के दिन देश के अनेक भागों में इस दिन बच्चों की पढाई-लिखाई का श्रीगणेश किया जाता है. बच्‍चे को प्रथमाक्षर यानी पहला शब्‍द लिखना और पढ़ना सिखाया जाता है. आन्ध्र प्रदेश में इसे विद्यारम्भ पर्व कहते हैं. यहां के बासर सरस्वती मंदिर में विशेष अनुष्ठान किये जाते हैं

सरस्वती वंदना श्लोक - Saraswati Vandana Shloka

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ 
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। 
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥
शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्। 
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥ 
हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌। 
वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥

सरस्‍वती वंदना - Saraswati Vandana

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। 
जग सिरमोर बनायेँ भारत वह बल विक्रम दे ॥ 
साहस शील ह्रदय मेँ भरदे, जीवन त्याग- तपोमय कर दे, 
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। 
लव,कुश,ध्रुव,प्रहलाद बने हम, 
मानवता का त्रास हरेँ हम, सीता, 
सावित्री, दुर्गा माँ, फिर घर-घर भर दे, 
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे॥

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