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माघ मास (Magha Maas) में शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha) में पड़ने वाली अष्टमी तिथि को भीष्म अष्टमी (Bhishma Ashtami) कहते हैं इस तिथि को व्रत करने का बड़ा महत्व होता है भीष्म अष्टमी (Bhishma Ashtami) भीष्म पितामह (Bhism Pitamah) की जयंती के रूप में मनाई जाती है ऐसा माना जाता है भीष्म अष्टमी (Bhishma Ashtami)के दिन ही भीष्म पितामह (Bhism Pitamah) सूर्य के उत्तरायण होने पर अपने प्राण त्यागे थे तो आइये जानते है - भीष्म अष्टमी का महत्व - Bhishma Ashtami Ka Mahatva


Importance Of Bhishma Ashtami - भीष्म अष्टमी का महत्व

ऐसा माना जाता है कि भीष्म अष्टमी के दिन भीष्म पितामह को जो श्रद्धालु कुश, तिल, जल के साथ श्राद्ध, तर्पण करता है, उसे संतान तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है  और कोई निसंतान व्यक्ति इस करता है तो संतान की कामना भी पूरी होती है। व्रत करने वाले व्यक्ति को चाहिए, कि इस व्रत को करने के साथ-साथ इस दिन भीष्म पितामह की आत्मा की शान्ति के लिये तर्पण भी करे। पितामह के आशिर्वाद से व्रत रखने वाले  को पितामह समान संतान की प्राप्ति होती है। भीष्म अष्टमी का व्रत रखने से वर्ष भर हमसे जाने अनजाने जो पाप होते है वो नष्ट जाते है और साथ ही पितृदोष से मुक्ति मिलती है 


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