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कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) कहा  है   यह  व्रत दीपावली से ठीक एक  सप्ताह पूर्व आता है। कहा जाता है इस व्रत को संतान वाली स्त्रियाँ करती हैं, जिसमें अहोई देवी के चित्र के साथ सेई और सेई के बच्चों के चित्र भी बनाकर पूजे जाते हैं।तो आइये जानते हैं - अहोई अष्टमी का महत्व  - Ahoee Ashtamee Ka Mahatv


अहोई अष्टमी का महत्व - Importance Of Ahoi Ashtami


अहोईअष्टमी का व्रत पुत्रों व् पुत्रियों के कल्याण,दीर्घायु, सुख समृद्घि के लिए निर्जल करती हैं। सायंकाल घर की दीवार पर 8 कोनों वाली एक पुतली बनाई जाती है  इसके साथ ही स्याहू माता अर्थात सेई तथा उसके बच्चों के भी चित्र बनाए जाते हैं वैसे अब बाजार में भी अहोई माता का कैलेंडर मिल जाता है  पूजा से पूर्व चांदी का पैंडल  बनवा कर चित्र पर चढ़ाया जाता है और दीवाली के बाद अहोई माता की आरती करके उतार लिया जाता है और अगले साल के लिए रख लिया जाता है। व्रत रखने वाली महिला की जितनी संतानें हों उतने मोती इसमें पिरोती हैं
अहोई माता का आशीर्वाद पाने के लिए पुत्रवती महिलाएं करवाचौथ की भांति ही प्रात: तड़के उठकर सरगी खाती हैं तथा सारा दिन बिना  अन्न जल ग्रहण न करते हुए निर्जला व्रत करती हैं।और शाम को तारों को अर्ध देकर भोजन ग्रहण करती हैं यह व्रत वह महिलायें भी कर सकती  हैं जिनके संतान नहीं है ऐसा माना जाता है की अहोई माता की कृपा से निसंतान को भी  संतान की प्राप्ति होती है

Tag -  Importance of Ahoi Ashtami, dharma ahoi ashtami significance vrat vidhi in hindi, ahoi ashtami ka mahatva in hindi, Ahoi Ashtami 2017



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